Intzaar..
October 10, 2017
Mera pahla Pyar… (Part-2)
October 13, 2017

मेरा नाम अनिका है, यह मेरी लाइफ की वह स्टोरी है। जिसने एक तरफ से मेरी ज़िन्दगी तबाह भी कर दी और सवार भी दी। मैं आज तक नहीं समझ पाई उस पल को कोसुं या खुदा का शुक्रिया अदा करूं। यह बात आज से करीब 4-5 साल पहले की है। जब मैं 2nd year में थी और मेरी age 20 साल थी। मेरा कोई बॉयफ्रेंड नहीं था और न ही कभी बनाने का दिल किया। मेरे फ्रेंड्स बहुत सारे थे और मेरी क्लास के लगभग सभी लोगों से मेरी अच्छी बातचीत होती थी। एक दिन मेरी ही क्लास के एक लड़के का बर्थ-डे था। उसने क्लास के बाकि लोगों के साथ मुझे भी invite किया। शाम को जब मैं वहां पहुंची तो वहां सभी लोग डांस और ड्रिंक कर रहे थे। मुझे इस तरह की पार्टी का अंदाज़ा नहीं था तो मैं अपनी क्लास की लड़कियों को ढूंढने लगी, लेकिन वहां क्लास की लड़कियो में बस मैं अकेली ही थी, तभी मेरी क्लास के लड़के विशाल, विपिन और रहीम आये। उन्होंने मुझसे पूछा अकेली आई हो क्लास की बाकि गर्ल्स कहां मर गयी। तो मैंने भी हंसते हुए कहा दिया, कमिनियों ने धोखा दे दिया मुझे। तो वो सब भी हँसने लगे और बोले कोई बात नहीं चलो कुछ खाते हैं।
हमने थोड़े बहुत स्नैक्स खाये और विशाल ने मुझे ड्रिंक ऑफर की… लेकिन मैंने यह कह कर मना कर दिया कि मैं ड्रिंक नहीं करती। तो उन्होंने थोड़ा फ़ोर्स किया तो मैं सॉफ्ट ड्रिंक के लिए मान गयी और विपिन के कहने पर विशाल और रहीम मेरे लिए कोला लेने चले गये। थोड़ी देर में दोनों कोला लेकर आए। हमने साथ में ड्रिंक की मैंने कोला और उन्होंने एल्कोहल पिया। फिर रहीम ने कहा चलो डांस करते हैं, तो हमने अपनी पसंद का म्यूजिक लगाया और डांस करने लगे। थोड़ी देर बाद मेरा सर जोरो से दर्द करने लगा। मुझे लगा शायद ज्यादा डांस और फालतू खाने की वजह से मेरी तबियत ख़राब हो रही है। मैंने विशाल और रहीम को बोला तो उन्होंने थोड़ी देर बैठ जाने के लिए बोला और कहा जब ठीक लगे बता देना हम तुम्हें घर छोड़ देंगे। शायद यही मेरी लाइफ की सबसे बड़ी भूल थी। तीनों ने मुझे चेयर पर बिठा दिया। फिर थोड़ी देर बाद मुझे ऐसा लग रहा था जैसे कोई मुझे जबरदस्ती उठा कर ले जा रहा है लेकिन मैं जरा भी रियेक्ट नहीं कर पा रही थी। उसके बाद मैं बेहोश हो गयी और जब उठी तो मैं ज़मीन पर पड़े एक गद्दे के ऊपर थी और मेरा पूरा बदन जख्मों से भरा था मेरे बदन पर कपड़े का एक टुकड़ा भी नहीं था। यह सब देखकर मैं पागल सी हो गयी और आस-पास पड़े कपड़ो को अपने बदन से लपेट कर रोने लगी। मैंने खुद को संभाला और उठने की कोशिश करने लगी। मैं अपने ज़ख्मों की वजह से ठीक से चल भी नहीं पा रही थी, मैं किसी तरह रोते बिलखते हुए उठी और कमरे से बाहर निकली लेकिन कल तक जहां इतने लोग खुशियां मना रहे थे आज वहां कोई भी नहीं था। बस जगह-जगह ग्लास और दारू की कुछ बोतले पड़ी थी। मैं समझ चुकी थी मेरे साथ क्या हुआ है लेकिन मानना नहीं चाह रही थी मैंने खुद को नोचे जा रही थी कि काश यह कोई बुरा सपना हो और मैं जाग जाऊं। लेकिन ऐसा नहीं था मैंने अपना सबकुछ खो दिया था और जानती थी किसने मेरे साथ यह दरिंदगी की। मैं रोते बिलखते गेट से बाहर निकली और ऑटो लेकर अपने घर पहुंची। रात भर से मेरे घर न पहुंचने की वजह से माँ बाहर वाले कमरे में ही मेरा इंतज़ार कर रही थी उनके हाथ में फ़ोन था और शायद वो बार-बार मुझे ही लगा रही होंगी। उन्होंने मुझे देखते ही भागते हुए मेरे पास आई और मेरी हालात देख कर घबरा गयी और एक डरी ख़ौफ़ से भरी आवाज में मुझसे पूछा यह क्या हुआ। मैंने माँ को सारी बात बताई। लेकिन मुझे संभालने की जगह वो रोते हुए मुझे मारने लगी। शोर सुन कर मेरी छोटी बहन और पापा भी आ गये। थोड़ी ही देर में मेरे घर में मातम जैसा माहौल था हर कोई रो और खुद को कोस रहा था। अब घर वालों ने कहीं भी मेरा बाहर आना जाना बंद कर दिया और मुझे मेरे ही घर में इस तरह से रखे जाने लगा जैसे मेरे साथ जो हुआ उसकी जिम्मेदार मैं खुद हूँ। मेरे ही पापा जो मुझे इतना प्यार करते थे मुझे घृणा की नजरों से देखने लगे थे। मेरे साथ दुख दर्द का सिलसिला यहीं नहीं थमा और 3 महीने बाद में प्रेग्नेंट हो चुकी थी। यह सब पता चलने के बाद मेरे घरवालों ने मुझे बुरी तरफ से मारा-पीटा और गन्दी गन्दी गालियां दी। फिर समाज के डर से पापा मेरा अबॉर्शन करवाना चाहते थे, लेकिन इसमें उस बच्चे की क्या गलती थी। वो नन्हीं सी जान जो अब तक इस दुनिया में भी नहीं आया था। उसे क्यों मौत की सजा सुनाई जा रही थी। मेरे लाख समझाने पर भी पापा नहीं माने और किसी से पता करके मुझे एक क्लीनिक ले गए। वहां यह सब काम होते नहीं थे लेकिन पापा ने जब मेरी पूरी कहानी वहां के सीनियर डॉक्टर को बताई तो उन्होंने वहां हमें एक डॉक्टर के पास जाने को बोला और कंपाउंडर को बोल के हमें साथ भेज दिया। कंपाउंडर हमें वहां डॉक्टर श्रीवास्तव के पास ले गया। मैं बहुत डरी थी मन में यही चल रहा था कि मैं अपने बच्चे के साथ ऐसा नहीं होने दे सकती। वहां जाते ही एक डॉक्टर मिले जिनकी age लगभग 28 साल होगी। उन्होंने मेरी पूरी बात सुनने के बाद मेरी तरफ देखा। मेरी तबाही की कहानी सुन कर वह कुछ बोल तो नहीं पा रहे थे लेकिन मेरे लिए दर्द उनकी आँखों में साफ़-साफ़ नजर आ रहा था। उन्होंने चेक-अप का बोल कर पापा को बाहर जाने के लिए कहा। उनके जाते ही मैं रोने लगी और अपना चैक-अप करवाने से मना कर दिया और कहा मैं यह बच्चा नहीं गिरा सकती इसमें इसकी क्या गलती है। उन्होंने मुझे बहुत प्यार से चुप करवाया और कहा आप चैक-अप करवा लो मैं कुछ करता हूँ। चैक-अप के बाद उन्होंने मुझे कुछ ताकत की दवाईयां लिख दी और पापा से कहा अभी यह बहुत कमजोर है अभी कुछ भी करना गलत होगा। डॉक्टर होने की वजह से पापा उनकी बात मन गए और मुझे नेक्स्ट वीक चैक-अप के लिए आने था। मैं नेक्स्ट वीक इस उम्मीद के साथ डॉक्टर के पास गयी कि शायद वो मेरी मदद करेंगे और उन्होंने किया भी ऐसा ही। उनका असली नाम विक्रम श्रीवास्तव है। उन्होंने मुझे पुलिस में जाने के लिए बोला लेकिन मैंने अपने परिवार के खिलाफ कोई भी कदम उठाने से मना कर दिया। मैंने उनसे कहा अगर पापा यही चाहते हैं कि यह बच्चा इस दुनिया में न रहे तो ठीक है मैं भी अपने बच्चे के साथ मर जाऊंगी। यह बात कह कर मैं जोर-जोर से रोने लगी। उनसे यह देखा नहीं गया और उन्होंने मुझसे हमदर्दी दिखाते हुए गले लगाया और चुप होने के लिए कहा। लेकिन उस घटना के बाद मुझे किसी पर भरोसा नहीं था तो मैंने गलती से उन्हें धक्का दे दिया। जिसकी वजह से पास की टेबल में लगी कील उनके हाथ में चुभ गयी और खून निकल आया। लेकिन उन्होंने अपनी चोट पर ध्यान न दे कर मुझे चुप करने में लग गए। मैंने उनके हाथ में खून देखा तो उसी हालात में उनसे माफ़ी मांगनी चाही लेकिन उन्होंने कहा, यह खून तुम्हारे इन आंसूओं से कीमती नहीं हैं। प्लीज तुम रोना बंद करो। उनकी यह बात सीधे मेरे दिल पर लगी। लोगों को इतने ताने सुनने के बाद और अपने साथ हुए उस अंजाम के साथ मैंने तो सभी से प्यार और हमदर्दी की उम्मीद ही छोड़ दी थी। विक्रम के साथ अब मैं सेफ फील करने लगी थी। कुछ हफ़्तों के चेक-अप के बाद पापा ने मुझे दूसरे डॉक्टर के पास ले जाना चाहा तो मैंने यह बात विक्रम को बता दी। थोड़ी देर में विक्रम मेरे घर आ गए और हंगामा मचा दिया। पापा और विक्रम के बीच हाथापाई हो गयी। माँ ने बीच में आ कर दोनों को रोकने की कोशिश की जिसकी वजह से उनके बाल विक्रम के हाथ में आ गए और माँ को देख कर वो रुक गए। फिर पापा ने विक्रम को जाने के लिए कहा पर वो नहीं मान रहे थे। उन्होंने मुझे अपने साथ चलने को कहा तो माँ और पापा उन पर भड़क गए कि तू भी मेरी बेटी के साथ वही करना चाहता है जो उन दरिंदो ने किया। तभी उनका एक जवाब सुनकर मैं सकपका गयी। विक्रम जी ने कहा कि मैं अनिका से शादी करना चाहता हूं। मैं समझ नहीं पा रही थी कि वह क्या कह रहे हैं। थोड़ी देर के लिए जैसे सब ठहर-सा गया। मैं एक-टक उनकी आँखों में देख रही थी और उनकी आँखे साफ़ साफ़ उनके दिल का हाल बयां कर रही थी। मैंने माँ की तरफ देखा तो उन्होंने मेरे से मुंह फेर लिया लेकिन पापा की आँखों में आंसू थे। और यह आंसू ख़ुशी के थे। पापा अपने घुटनो के बल बैठ गए और विक्रम जी से माफ़ी मांगी। उसके कुछ दिन बाद मैंने और विक्रम जी ने कोर्ट मैरिज कर ली। आज इस घटना को 4 साल बीत चुके है और हमारी एक 3 साल की बच्ची भी है। जिसका नाम अराध्या है। मैं आज भी यह सोचती हूँ, कि अगर मेरे साथ वो सब न हुआ होता तो शायद मुझे विक्रम जी कभी न मिल पाते।

Story by- आदित्य सेन
Edited by-विपिन उत्तम

1 Comment

  1. mansi says:

    this story….OMG Fabulous.
    aditya who r u yaar seriously amazing..
    plz contact me, i want talk to u

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