Half-boyfriend(sanjh)
October 18, 2017
Jaan..
November 16, 2017

Hii.. मेरा नाम मीरा है, मैं मुम्बई के वसंत कुंज में अपनी दोस्त रिद्धिमा के साथ रहती हूँ। हां मैं एक lesbian हूँ और मुझे कोई शर्म नहीं यह स्वीकारने में कि मैं एक समलैंगिक हूँ। यह फैसला मेरा था, मेरी इच्छा थी तो लोग कौन होते है मुझे बच्चलन कहने और गालियां देने वाले। मैंने तो आपके भगवान से नहीं कहा था मुझे इंसान बनाओ। हां मैं हमेशा से ऐसी नहीं थी। क्योंकि मुझे प्यार के अहसास का मतलब रिद्धिमा ने बताया। किसी को अपना मान कर सब कुछ लुटा देना क्या होता है मैंने यह तब जाना जब मेरी मुलाकात रिद्धिमा से हुई। हमारी कहानी social media से शुरू हुई थी। यह बात तब की है, जब मैं अपने कॉलेज के 2nd ईयर में थी। मैंने स्कूल और कॉलेज दोनों ही मुम्बई से किये हैं। मैं एक biology की स्टूडेंट थी और डॉक्टर बन कर अपने मम्मी-पापा के लिए कुछ करना चाहती थी। यही सपना लेकर मैं अपने पास के एक अच्छे कॉलेज में एडमीशन लिया था। जब मैं 2nd ईयर में थी तो दूसरी लड़कियों की तरह मेरा भी दिल करता था मेरा कोई बॉयफ्रेंड हो जो मुझे प्यार करे और मेरे साथ कुछ लम्हें बिताये। शायद इसी खोज में, मैंने facebook पर अपना अकाउंट बनाया और बहुत सारे लड़को को request भेज दी। अगर कोई भी लड़के की request आती तो मैं तुरंत ही उसे add कर लेती और msg का इंतजार करने लगती थी। एक दिन रात के वक़्त जब में कॉलेज की पढ़ाई कर रही थी तो मुझे सुमित नाम से एक रिक्वेस्ट आई। उसमे उसका फ़ोटो तो नहीं लगा था लेकिन फिर भी मैंने उसे एक्सेप्ट कर लिया और हमारी चैटिंग शुरू हो गयी। इतने दिनों में यह पहली बार था जब मुझे किसी से बात करके इतना मजा आ रहा था। सुमित ने मुझे बताया की वो भी डाक्टरी की पढ़ाई कर रहा हैं और मेरे पास के ही कॉलेज में है। यह सब जान कर मुझे सुमित में कुछ ज्यादा ही इंट्रेस्ट आने लगा था। क्योंकि मेरे घर के पास होने की वजह से मेरी उसकी मुलाकात भी हो सकती थी और साथ ही जिस तरह इसकी बातें थी उससे मुझे इतना तो अंदाज़ा हो ही गया था कि यह लड़का मुझे बहुत प्यार करने वाला है। बस मुझे इंतजार था तो उसके इजहार करने और मेरे करीब आने का। मैंने उसे अब तक देखा नहीं था लेकिन उसने अपनी बातों से ही मुझे मदहोश कर दिया था। अब हमारी बात आगे बढ़ने लगी थी और धीरे-धीरे हमने अपने सारे सीक्रेट्स एक दूसरे को बताने शुरू कर दिए थे। यहाँ तक कि मैंने क्या पहना हुआ है यह तक मैं उसे खुल कर बता दिया करती थी। उसकी बाते सुन के मन ही मन खुश हुआ करती थी। अब हमारी chat धीरे-धीरे sex chat तक आ गयी थी। उसकी बातों से ही जैसे मेरे अंदर आग से भड़क उठती थी। वो बहुत कामुक बातें करता था जिसकी वजह से कई बार में अपने जिस्म के साथ वो कर बैठती थी जो हम लड़कियो के लिए बहुत शर्मनाक मना जाता रहा है। एक दिन सुमित ने मुझे chat पर बोला की बहुत दिन हो गए और आज तक न हमारी मुलाकात हुई न तुमने मुझे देखा, मैं तुमसे मिलना चाहता हूँ। मैंने तुरंत उसे हां कह दिया और गार्डन में आने को बोला क्यों की मैं भी अंदर से उसे मिलने के लिए बेताब थी। लेकिन सुमित ने एक शर्त रखी कि हो सकता है यह हमारी आखिरी मुलाकात हो लेकिन तुम मुझसे कभी नफरत नहीं करोगी। मेरे दिमाग में अब सुमित की एक अजीब से image बनने लगी थी लेकिन मैंने सोचा चाहे जो हो मैं एक बार सुमित से मिलना जरूर चाहूंगी और मैं शाम को अपने बताये हुए समय पर गार्डन पहुंच गयी। मैं गार्डन के गेट पर सुमित का इंतजार करने लगी क्योंकि मैने उसे आज तक कभी देखा नहीं था हमारी सिर्फ chat पर ही बात हुई थी। सुमित ने भी मुझे सिर्फ फेसबुक DP और कुछ फोटोज में ही देखा था जो मैं अक्सर मूड में आ कर उसे भेज दिया करती थी। करीब 15-20 मिनट इंतजार करने के बाद भी सुमित नहीं आया। इतने में ही वहां मेरी सीनियर आ गयी मैं उन्हें देख के थोड़ा पीछे छुपने लगी लेकिन उन्होंने मुझे आवाज लगा कर रोक लिया शायद वो मुझे पहचान गयी थी। मैं रुक गयी और बात घूमाते हुए उनसे पूछा अरे दी आप यहां। क्या बात है किसी से मिलने आई हो क्या और हँसने लगी।
उन्होंने भी हँस और कहा अंदर चलकर बैठते है वहीं सब बात करेंगे। मैं जाना तो नहीं चाहती थी लेकिन उनके जिद करने पर मुझे उनके साथ अंदर जाना पड़ा। लेकिन मेरी नज़रें अब भी गेट पर आ रहे हर एक लड़के पर थी और उम्मीद कर रही थी कि शायद यह सुमित ही हो। दीदी ने मुझसे पूछा बाहर क्यों देख रही हो कोई और भी आने वाला है क्या? मैंने उन्हें कहा नहीं दी बस एक दोस्त आने वाला है मुझे कुछ नोट्स लेने थे उससे।
दीदी ने मुझसे कहा सुमित नोट्स नहीं लाएगा, क्योंकि सुमित तुम्हारे सामने बैठा है। मैं सुमित का नाम सुन कर चौंक गयी, क्योंकि दीदी के मुंह से सुमित का नाम सुनने की उम्मीद मुझे बिल्कुल नहीं थी। मैंने दीदी को अजीब सी आवाज में पूछा आप सुमित को कैसे जानती हो। दीदी ने कहा शांत हो जाओ मुझे तुमसे कुछ कहना है।
मैंने कहा कहो। उन्होंने जो कहा वो सुन कर मेरे पैरों तले जैसे जमीन ही छीन ली गयी हो। मैं समझ नहीं पा रही थी कि यह सब क्या हो रहा है।
दीदी ने मुझे कहा मैं तुमसे प्यार करती हूँ। इतने दिन तुमसे सुमित बन कर बात कर रही थी क्योंकि इसके सिवा मेरे पास दूसरा कोई option नहीं था। मैं direct तुमसे यह सब कहती तो शायद तुम मुझसे बात भी नहीं करती। दीदी का नाम रिद्धिमा था। मैंने पहली बार रिद्धिमा से तू करके बात की थी। मैंने उन्हें बहुत बुरा भला सुनाया और उनको दुत्कारते हुए वहां से उठ कर चली आई। वो रो रही थी लेकिन उस वक़्त मुझे उनसे घिन आ रही थी और गुस्सा भी किया। उन्होंने मेरी फीलिंग्स के साथ खेला और मेरा मजाक बनाया। मैं उस पूरी रात सो नहीं पायी दिमाग में एक तरफ गुस्सा भरा हुआ था और दूसरी तरफ हमारे बीच हुई वो बातें। मुझे अब डर भी लग रहा था कि कहीं वो हमारे बीच हुई उन बातो को public ना कर दें…
मैं अगले दिन उनसे मिलने उनके फ्लैट गयी, उन्हें यह समझाने या यूं कहो कि धमकाने। ये बातें किसी और को पता चली तो मुझसे बुरा कोई नहीं होगा। मैंने गेट बिना नोक किये सीधा उनके रूम में घुस गयी। लेकिन वहां का नजारा देख कर मेरे होश उड़ गए। उनका सारा कमरा बिखरा पड़ा था। जगह जगह फिश टैंक के कांच के टुकड़े बिखरे पड़े थे ऐसा लग रहा जैसे सारा घर किसी ने बेहरहमी से तोड़ फोड़ दिया हो। मैं रिद्धिमा को उठाया उसकी आँखे रो रो कर लाल हो रखी थी और पूरे चेहरे पर काजल बिखरा हुआ था। वो मुझे देख कर रोते हुए सिसकारियां लेते हुए मुझसे हाथ जोड़ कर माफ़ी मांगने लगी। कहने लगी तुम जैसा कहोगी मैं वैसा करुँगी मगर मुझे छोड़ कर मत जाओ। मैंने उन्हें उठा कर बेड पर बिठाया और उन्हें चुप कराने लगी। मेरा गुस्सा अब चिंता और एक अजीब सी दया में बदल गया था। मुझे उनकी हालात देख कर उन पर तरस आ रहा था कि मेरी वजह आज इनकी यह हालात हो गयी है। मैंने उनसे वादा किया कि मैं उन्हें छोड़ कर कभी नही जाउंगी और हमेशा एक दोस्त बन कर उनके साथ रहूंगी। अब अक्सर मैं उनके घर(फ्लैट) पर आती जाती रहती थी वो मेरी हर बात मानती थी। मैं जानती थी वो मुझसे बहुत प्यार करती हैं और यह प्यार सिर्फ दोस्त वाला प्यार नहीं था। एक दिन जब उनकी तबियत कुछ ठीक नहीं थी तो मैं उनके साथ उनके घर पर उनकी देखभाल के लिए रुक गयी। मैंने उन्हें दवाई दी और सोने को कहा उन्होंने कहा प्लीज़ थोड़ी देर मेरे पास आ कर लेट जाओ, जब मैं सो जाऊं तो चली जाना मैं उनके पास लेट गयी रात के करीब 2-3 बजे मुझे अपनी बॉडी पर किसी के छुने का अहसास हो रहा था। मैं घबरा कर उठी तो दीदी का हाथ मेरे कुर्ती के बटन के अंदर था और वो मुझे छुने की कोशिश कर रही थी। मैं उनका हाथ दूर करते हुए बोला यह सब क्या हरकत कर रही हो आप। आप बीमार थी इसलिए मैं आपके पास रुक गयी इसका मतलब यह नहीं की अब उसका गलत मतलब समझो।
दीदी ने मुझे अजीब तरह से कहा प्लीज़ बिट्टू, अगर तुझे अच्छा न लगे तो मैं दोबारा तेरे पास भी नही आउंगी। पता नहीं मुझे क्या हो गया और मैं उनकी बात मान गयी। उस रात हमारे बीच वह सब हुआ जो 2 लड़कियो के बीच शारीरिक सम्बन्ध के दौरान हो सकता था। मैं भी पूरी तरह उनके इस नशे में डूब चुकी थी और शायद उस खुमार से निकलना भी नहीं चाह रही थी। सारी रात हमारे बीच वो सब चला और जब सुबह मैं उठी तो न जाने क्यों लेकिन में खुद को एक पुर्ण नारी के रूप में महसूस कर रही थी। अब हमारे बीच जो हुआ वो लगभग रोज होने लगा था। मुझे लड़को के नाम से जैसे नफरत सी होने लगी थी। मुझे भी रिद्धिमा से, उसके छूने और उसकी हर एक बात से जैसे प्यार हो गया था।
थोड़े दिन बाद मेरे घर वालों को हमारे बीच की बढ़ती दोस्ती के बारे में पता चल गया और पापा ने यह कह कर कि रिद्धिमा मेरी लाइफ बर्बाद करना चहती है, कह कर मेरा उससे मिलना बंद कर दिया। भैया और पापा अब मिल कर मेरी शादी करवाना चाहते थे। मैंने कॉलेज में रिद्धिमा को यह सब बात बताई। रिद्धिमा रोने लगी और मुझे अपनी नस काटने की धमकी देने लगी। मैं डर गयी क्योंकि मैं भी रिद्धिमा को अब खोना नहीं चाहती थी। हम दोनों ने घर से दूर जाने का फैसला किया और भाग कर दिल्ली आ गये, क्योंकि अब यही एक ऐसी जगह थी जहाँ शायद लोग हमें इतनी गिरी नजरों से न देखें।
हमने शादी तो नहीं की लेकिन हमें साथ रहते पूरे 3 साल हो गए हम दोनों यहाँ एक कॉल सेंटर में जॉब करते हैं और रूम लेकर रहते हैं। मुझे अफ़सोस हैं कि मैंने अपने घर वालों को धोखा दिया लेकिन मैं उन्हें यह बताना चाहती हूँ कि मैं जैसे भी हूँ खुश हूँ। पता नहीं मेरे घर वाले मुझे कभी माफ़ करेंगे या नहीं।

WRITER- ADITYA SEN
EDITER- VIPIN UTTAM

4 Comments

  1. terimeri says:

    really this story touch my soul… i love it

  2. Weldone.. apne jo kadam uthaya usse tuthane se pahle log 50 bar chonge.
    Or yeh time samjhne ka hai ki bhale lesions h lekin h to ladki hi. Apke pass bhi dil hai

  3. Radhe says:

    Bohot badiya Mira Ji..

  4. Saina khan says:

    यह मुद्दा आज के समय मे समाज के लिए बेहद जरूरी है। आपने इस कहानी के माध्यम से समाज को आईना दिखाया है। आपकी सोच को और आपकी टीम को सैल्यूट बनता है जी।

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