Confidence..
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Love With Senior..
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मेरा नाम सोनिया है। मै इंदौर की रहने वाली हूँ। लोग अक्सर प्यार में धोखे खाते हैं या किसी तीसरे की वजह से बदल जाते हैं। लेकिन मैंने अपना प्यार और खुशियां अपनी बेवकूफी और डर की वजह से खोया।
जब मैं कॉलेज में थी तो अंकुर नाम के एक लड़के से मुझे प्यार हो गया। वो देखने में बहुत सुन्दर था लेकिन उससे भी सुन्दर उसका दिल था। वो मुझे बहुत प्यार करता था। हर वक़्त मेरा ख्याल रखना, मेरे लिए वो सबकुछ करना जो एक लड़की अपने बॉयफ्रेंड से एक्सपेक्ट करती है। हमारी मुलाकात कॉलेज बस में एक ट्रिप के दौरान हुई थी। मुझे उसे पा कर ऐसा लगने लगा था जैसे लाइफ में जो माँगा था। जितनी wishes थी सब उस एक नाम में पूरी हो गयी हो।
मैं अंकुर के बारे में अपने घर वालों को बताना चाहती थी लेकिन डर लगता था पापा यह सब जान कर ना जाने क्या करते। बहुत कोशिशो के बाद भी मैं उसके बारे में घर पर कुछ न बता सकी। पापा भी मेरी शादी के लिए लड़का तलाश करने लगे थे। मैं रोज सोचती थी कि आज बता दूंगी कल बता दूंगी लेकिन मुझे हिम्मत जुटाने में बहुत देर हो गयी। पापा मेरा रिश्ता तय कर आए । मैं घर पर बहुत रोई-गिड़गिड़ाई कि Please पापा मुझे इतनी जल्दी शादी नहीं करनी। लेकिन लड़कों वालों के ज्यादा फ़ोर्स करने की वजह से पापा नहीं माने।
मैं अंकुर को यह सब बताना चाहती थी, लेकिन उसके लिए भी मेरे पास इतनी हिम्मत नहीं थी कि मैं उससे आँखे मिला कर यह सब कह सकुं कि मैं अब किसी और की होने जा रही हूँ। मैंने उससे बात ना करने का फैसला किया। अपनी फ्रैंड से अंकुर तक यह बात पहुंचा दी कि मैं उसे हमेशा से धोखा दे रही थी और उसके साथ प्यार का नाटक कर रही थी।
लगभग एक या डेढ़ महीने बाद मेरी शादी हो गयी। शादी में अंकुर भी आया। मैं उसे गले लगा कर रोना चाहती थी। बताना चाहती थी कि मैं सिर्फ उससे ही प्यार करती हूँ। लेकिन अपने मम्मी पापा की खातिर आज उसी से मुंह फेर कर खड़ी थी जिसे देखे बिना मेरा एक पल नहीं गुजरता था। मैंने फेरे लिए और अपने परिवार की इज्जत के ख़ातिर अपने आंसू सीने में दबाये और ससुराल चली गयी। मैंने इसे अपनी किस्मत मान कर स्वीकार कर लिया था।
मेरे ससुराल में हम चार लोग थे। मैं, सास-ससुर और मेरे पति सुमित। 2-3 दिन घर में सब ठीक चला, मेहमानों के साथ देर रात बैठना और फिर सो जाना। लेकिन मुझे सुमित का मेहमानों के साथ पार्टी के नाम पर हर रोज ड्रिंक करना कुछ अजीब लगता था। सब रिश्तेदारों के जाने के बाद सुमित रोज अपने फ्रैंड्स को घर बुलाने लगे और पार्टी के नाम पर शराब पीने लगे। एक दिन मुझसे रहा नहीं गया तो मैंने उन्हें प्यार से समझने की कोशिश की, कि आज किसी को मत बुलाओ रोज शराब पीना अच्छी बात नहीं। लेकिन शायद मेरी बात सुमित को चुभ गयी और उन्होंने मुझे थप्पड़ मार दिया। मैं अपने कमरे में जाकर बहुत रोई।
माँ के मंदिर से आने पर उन्होंने मुझे चुप करवाया। पूरे घर में सिर्फ एक माँ ही थी जो मुझे बहु न मान कर अपनी बेटी की तरह प्यार करती थी। लेकिन आज सुमित के हाथ उठाने से मैं घर में अपनी value जान गयी थी। अब मैं हर वो कोशिश करने लगी जिससे सुमित खुश रह सकें। लेकिन ना जाने क्यों वह किसी ना किसी बात पर गुस्सा हो ही जाते थे। गुस्से में कभी मारते पीटते तो कभी माँ-बहन की गालियां देकर जलील करते।
मेरा हर एक दिन दर्द और आंसुओ में बदल गया। हर रोज किसी ना किसी बात पर मुझे मार जाता या घर से निकल दिया जाता। मेरे माता-पिता ने जिस चेहरे पर मुस्कान की कामना कर मुझे ससुराल भेजा था। आज उसी चेहरे पर मार पीट के दागों के सिवा कुछ नजर नहीं आता।
मैंने कई बार अपने घर में सुमित के बारे में बताने का सोचा लेकिन मैं जानती थी कि अगर मैंने कुछ बोला तो सुमित मुझे जान से मार देंगे। उन्होंने कई बार गुस्से में मुझे जलाने की भी कोशिश की लेकिन माँ(सास) किसी तरह मुझे बचा लेती थी। लेकिन अब मैं खुद भी जीना नहीं चाहती थी।
हर रोज की मारपीट और जिल्लत भरी जिंदगी से तो अच्छा सुमित मुझे मार ही दे।
मैं रोज रोती हूँ, भगवन से मौत की दुआ मांगती हूँ कि आज किसी तरफ इस दर्द भरी जिंदगी से मुक्ति मिल जाये। आज मुझे अपनी गलती का अहसास है कि मैंने अपनी ना-समझी की वजह से क्या खो दिया और अपने साथ-साथ अंकुर की जिंदगी भी बर्बाद कर दी।
अब मुझे अंकुर का प्यार और respect बहुत याद आते हैं। मैं खुद को कोसती हूँ कि काश थोड़ी हिम्मत कर ली होती तो इतनी जिंदगियां बर्बाद होने से बच जाती।
इस स्टोरी को लिखने का मकसद यही है कि जीवन के बारे में कभी भी संकोच नहीं करना चाहिए। आपके मन में जो भी है हिम्मत करके अपने दोस्त या माता-पिता से सांझा जरूर करें। क्या पता आपके परिवार वाले उस बात पर राजी हो जाए। साथ ही आपको सच्चा और मनपंसद जीवनसाथी मिल जाए।

Writer- Aditya sen
Editor- Vipin Uttam

1 Comment

  1. ram says:

    thodi himmat karti to apke sath esa nahi hota